शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

वाह बेनी बाबू, नसे में हैं क्या ?

'सिर्फ मुलायम-डिंपल के जीतने के आसार'

only mulayam and dimple will win
उत्तर प्रदेश का शाहजहांपुर जिला कांग्रेस और सपा दोनों के लिए उपजाऊ राजनीतिक भूमि है। दोनों के ही एक-एक मंत्री बृहस्पतिवार को शहर में थे।

एक केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा जो अपने बयानों को लेकर दिग्विजय सिंह की तरह चर्चा में रहते ही हैं। उन्होंने जो कुछ कहा, उसका जवाब लगे हाथ प्रदेश के कृषि मंत्री मनोज कुमार ने दे दिया।

सपा को यूपी में मिलेंगी लोकसभा की दो सीटें

बेढंगे और बिंदास बयानों के लिए सुर्खियों में रहने वाले केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने बृहस्पतिवार को यहां पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में यूपी से समाजवादी पार्टी को सिर्फ दो सीटें मिलने के आसार हैं।

अपने ‘पुराने मित्र’ मुलायम पर सियासी फायदे के लिए भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर में दंगा मुलायम, मोदी और अमित शाह की साजिश का नतीजा हैं।

कांग्रेस हाईकमान द्वारा जिले के सांगठनिक मामलों का प्रभारी नामित किए जाने पर लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी संगठन की समीक्षा और कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनने आए केंद्रीय इस्पात मंत्री ने कहा कि मुलायम से अतीत की नजदीकियों के कारण उनकी नस-नस से परिचित हैं।

मुलायम वर्ष 1990 से भाजपा के सहयोगी रहे हैं। वह यही चाहेंगे कि केंद्र में भाजपा और सूबे में सपा की सरकार बनी रहे। भाजपा से उनकी इसी नजदीकी का नतीजा है मुजफ्फरनगर का दंगा।

बेनी बाबू ने लोकसभा चुनाव में यूपी से कांग्रेस को पूर्ण बहुमत के साथ 50-60 सीटें मिलने का दावा किया। सपा का चुनावी भविष्य पूछे जाने पर तपाक से बोले कि यूपी में सिर्फ मुलायम और डिंपल की सीटें निकलने के आसार हैं। वह भी तब, जब इसके लिए वे सारी ताकत झोंकेंगे।

अगला चुनाव कांग्रेस के बजाय सीबीआई द्वारा लड़ने संबंधी गुजरात के मुख्यमंत्री का बयान याद दिलाने पर कहा कि यह मोदी नहीं, उनका पाप बोल रहा है।

यहीं पर बेनी बाबू नहीं चुपे। मुजफ्फरनगर के घटनाक्रम में सपा केवरिष्ठ नेता आजम खां का यह कहकर बचाव किया कि वह उनकेमित्र हैं। इस नाते कोई संदेह नहीं कि आजम को दंगे की प्लानिंग के बारे में जानकारी नहीं होगी।

अखिलेश भी दोषी नहीं, क्योंकि वे डमी मुख्यमंत्री हैं और सरकार मुलायम चला रहे हैं। बिहार के समानान्तर यूपी को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने की वजह पूछे जाने पर कहा कि यूपी को मुलायम ने गरीब किया।

राजस्थान रेगिस्तानी राज्य है, लेकिन वहां बिजली सरप्लस है। नेहरू के जमाने में यूपी की विकास दर सबसे अधिक और तमिलनाडु की सबसे कम थी, लेकिन अब विपरीत हालात हैं। राज्यों को उठाना-गिराना वहां की सरकारों का खेल है।

कांग्रेस बेनी के काटने का इलाज कराए: मनोज
प्रदेश के मंत्री मनोज कुमार ने यहां पत्रकारों से कहा कि बेनी प्रसाद वर्मा के काटने का इलाज कांग्रेस को कराना चाहिए। उन्होंने यह बात दोपहर को प्रेस वार्ता के दौरान बेनी के दिए गए बयान पर कही, जिसमें उन्होंने कहा था कि सपा सिर्फ दो ही सीटें जीतेगी।

मनोज कुमार ने वैसे तो बेनीप्रसाद के लिए बहुत कुछ कहा, मगर हम उतनी ही बात बता रहे हैं, जो उनके कहे का सार था। मनोज कुमार ने कहा कि बेनी प्रसाद जी बहुत अच्छे व्यक्ति रहे हैं, मगर वृद्धावस्था में उन्हें बीमारी हो गई है। वह चूंकि मानसिक रोगी हो गए हैं, इसलिए हमारी संवेदना भी उनके साथ है।

आपके शहर की ख़बरें

      गुरुवार, 19 सितंबर 2013

      ये जो कुछ कह रहे हैं 'किसी' नफे नुकसान के बतौर कह रहे हैं........

      मुलायम ने तोड़ा मुसलमानों का विश्वास : बुखारी

      Updated on: Wed, 18 Sep 2013 07:59 PM (IST)
      Samajwadi Party
      मुलायम ने तोड़ा मुसलमानों का विश्वास : बुखारी
      गाजियाबाद [जासं]। दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने आरोप लगाया है कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुसलमानों के विश्वास को तोड़ा है। केंद्र और प्रदेश सरकार मुसलमान को मात्र वोट समझती है।
      बुधवार को बुखारी जब मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ितों से मिलने जा रहे थे तभी पुलिस ने उन्हें यूपी गेट पर हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें वापस दिल्ली भेज दिया गया। वसुंधरा स्थित आवास विकास परिषद के अतिथि गृह में पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि वे मुजफ्फरनगर जाकर प्रदेश सरकार के उन दावों के बारे में पता लगाना चाहते थे जिन में कहा जा रहा है कि पीड़ितों को बेहतर सुविधा दी जा रही है। एक चैनल के स्ट्रिंग आपरेशन में प्रदेश सरकार के मंत्री आजम खां का नाम सामने आने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा है कि मैं ऐसे शख्स का नाम अपनी जुबान पर लेना ठीक नहीं समझता हूं। बुखारी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि आजम खां को बेवजह मुसलमानों का वोट दिलाने वाला नेता समझ कर मुलायम सिंह और अखिलेश उसे सरकार में शामिल किए हुए हैं।
      बुखारी केंद्र और प्रदेश सरकार से इस कदर नाराज दिखे कि उन्होंने कह दिया कि अगर मुसलमान किसी हिंदू सेकुलर नेता से मदद और सम्मान की उम्मीद रखें तो बेहतर होगा। शाही इमाम का गुस्सा यहीं नहीं रुका, उन्होंने कहा कि प्रदेश की हुकूमत को सपा को दिलाने वाले लोग आज शर्मिंदा हो रहे हैं। प्रदेश सरकार ने मुसलमानों और जनता से जो वादे किए थे वह पूरी तरह से भूल चुकी है।
      बुखारी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 84 कोसी यात्रा को रोक कर सिर्फ विश्व हिंदू परिषद को ताकत प्रदान करने का काम किया। इतनी फोर्स व समझदारी दंगा काबू करने में दिखाती और अफसरों को ठीक प्रकार से कार्रवाई करने दी जाती तो अब तक प्रदेश के दंगों में मरने वालों की संख्या हजारों में नहीं पहुंचती।
      गौरतलब है कि मंगलवार को भाजपा नेता उमा भारती के पुलिस-प्रशासन को चकमा देकर निकलने की घटना के बाद पुलिस-प्रशासन ने बुधवार को शाही इमाम अहमद बुखारी के मुजफ्फरनगर जाने की सूचना के बाद इंदिरापुरम पुलिस और एलआइयू को जामा मस्जिद से बुखारी के काफिले के पीछे लगा दिया गया।

      शुक्रवार, 23 अगस्त 2013

      शायद सपा समझ नहीं रही है .

      सपा कहीं ''बीजेपी'' के लिए रास्ता तो नहीं तैयार कर रही है ;
      जिसपर चलकर ये कांग्रेस की मदद करना चाहते हों ;
      भाजपा की साम्प्रदायिक छवि तैयार करने के चक्कर में सपा कहीं अपने लिए बड़े खतरे न खड़े कर ले, वैसे भी यह पार्टी जिन लोगों के चंगुल में फास चुकी है वो अधिकाँश लोग उसी भाजपा और कांग्रेस की लाइन के सोच के ही लोग हैं.
      अखिलेश यादव के जिस युवा चरित्र और नए उर्जावान चहरे को लोगों ने देखने का भ्रम पाला था वह नक्कारखाने में टूटी हुयी आवाज़ के रूप में ही सामने आ रहा है, यदि भाजपा का अंतर्कलह उसे गच्चा नहीं दिया तो सपा अनचाहे इतना उलटा करेगी जो इन संघियों के बहुत काम आयेगा.
      भाजपा/कांग्रेस के जो लोग सपा के गर्भगृह में बैठे हैं उसका मूल कारण यह है की सपा कभी अपने इमानदार कैडर बनाती ही नहीं है, कहीं से वोट के हिसाब से महाभ्रष्ट, जातिवादी, साम्प्रदायिक तत्वों को अपने इर्दगिर्द रखती है जिससे इसकी नीतियाँ ही इसके खिलाफ जाती हैं.
      इस बार की सरकार जिस तरह, जिन कारणों से बनी है कौन नहीं जानता. ऐसे सुयोग्य अवसर को छोड़कर ये उन्ही हालातों में पहुँच गए हैं जहां से जनता किसी भी सरकार को बाहर कर देती है. प्रदेश अनेक संकटों से जल रहा है चरों तरफ हाहाकार मचा हुआ है पर इन्हें नज़र ही नहीं आ रहा है.
      मिशन २०१४ के चलते प्रदेश में केवल २०१४ के लोकसभा के चुनाव की तैयारियां चल रही हैं, प्रदेश का मुख्यमंत्री देश के प्रधानमंत्री बनाये जाने के सपा प्रमुख के लिए वोट के इंतजामात में 'अनाप सनाप फैसले' ले रहा है 'आरक्षण' की लम्बी लड़ाई का खात्मा कर रहा है, तुष्टिकरण के तमाम फैसले ले रहा है, अपनों और परायों के बीच का अंतर भूल गया है, यही साड़ी बातें हैं जो अंदर तक नुक्सान पहुंचाती/करती हैं.
      जिस कांग्रेस के इशारों पर सपा बसपा ,'थिरक' रही हैं राजनितिक विश्लेषक उस मर्म को समझते हैं और अब वे यह भी जान गए हैं की ये देश की सत्ता के विकल्प नहीं है बल्कि कांग्रेस के सहयोगी ही हैं. यह आश्चर्य देश की अवाम जिसे दलित और पिछड़े के रूप में पहचाना जाता है कब समझेगा.
      यही कारण है की नरेन्द्र के राष्ट्रवाद से कांग्रेस कत्तई भयभीत नहीं है, इसलिए भी की जिस हिंदुत्व का बुखार भाजपाई चढ़ाना चाहते हैं उसी हिन्दू में देश की 85 फीसदी अवाम  दलित और पिछड़े के रूप में मौजूद हैं जिसे ये अलमबरदार अपने अपने खांचे में जातियों के हिसाब से बाटेंगे.जिसका असर यह होगा की 'मोदी' का उभार भी दब जाएगा और  दलित और पिछड़े के रूप में बड़े समुदाय का भी हिसाब हो जाएगा.
      आधुनिक भारत को समझना अब उतना आसान नहीं है क्योंकि ये आधुनिकता ही उस पुरातन सोच के समापन के लिए आयात की गयी है जिसमें समाजवाद के सारे सपने डुबोये जा चुके हैं सामाजिक न्याय की अवधारणा के मायने बदल दिए गए हैं तभी तो  दलित और पिछड़े के पार्टी रूप में पहचान रखने वाली पार्टियाँ उनके हक और हकुकों के लिए काम कर रही हैं जो सदियों से सब कुछ कब्जियाये हुए हैं.
      मुझे लगता है जिस अस्मिता की रक्षा के लिए मुलायम सिंह ने सारी बदनामी ली उसी मस्जिद को नरसिंघा राव की कांग्रेस सरकार ने ध्वस्त करा दिया था. वो काम भी इन दोनों ने भाजपा के लिए ही किया था वैसे ही आज के आसार नज़र आ रहे हैं.
      आखिर विकल्प क्या है ;
      विकल्प है ; 
      आखिर विकल्प क्या है ? विकल्प है! पर इसपर चले कौन जिस समय लालू ने अडवानी के रथ को रोका था उस समय की रोक और आज की इस रोक में अंतर ये है की तब अवाम को मंडल का भुत सवार था और अडवानी कमंडल के बहाने मंडल का विरोध कर रहे थे, इस बात को लालू समझा पाने में कामयाब हुए थे. पर अब सरकार इस धार्मिक पाखण्ड को कैसे पहचानेगी, क्या नाम देगी इसे अपने हक़ में कैसे करेगी सब सवाल उसके पाले में ही है. (उत्तर तो इसके हैं पर देखना है सरकार क्या करती है.)
      -डॉ.लाल रत्नाकर    

      (निचे की खबरें अमर उजाला से साभार ली गयी हैं)

      13 कंपनी पीएसी, 368 पुलिस अधिकारी रोकेंगे परिक्रमा!

      लखनऊ/इंटरनेट डेस्क | अंतिम अपडेट 24 अगस्त 2013 2:16 AM IST पर
      akhilesh meeting for parikrma security84 कोसी परिक्रमा पर संतों से टकराव की आशंका के मद्देनजर गृह विभाग की तैयारियों के बारे में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पूछताछ के बाद चौकसी बढ़ा दी गई है।
      मुख्यमंत्री ने गुरुवार को गृह विभाग के आला अधिकारियों से इस बारे में की गई तैयारियों की जानकारी मांगी है। इसके बाद अयोध्या समेत संबंधित जिलों व राज्य की सीमाओं पर चौकसी एकाएक प्रभावी कर दी गई है।
      माना जा रहा है कि सीएम ने अफसरों को इस संबंध में किसी तरह की कोताही नहीं बरतने की सख्त हिदायत दी है।
      विश्व हिंदू परिषद पिछले दिनों राज्य सरकार को एक पत्र सौंप कर संतों द्वारा अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा करे जाने के प्रस्तावित कार्यक्रम से अवगत कराते हुए आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने को कहा था।
      हालांकि, राज्य सरकार ने इसे नई परंपरा की शुरूआत होने की संज्ञा देते हुए परिक्रमा पर रोक लगा दी थी। संतों द्वारा राज्य सरकार के प्रतिबंध को मानने से मना कर दिया गया और हर हाल में परिक्रमा करने का ऐलान किए जाने के बाद अफसरों ने इसे रोकने के लिए सुरक्षा इंतजाम करने शुरू कर दिए थे।
      गुरुवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सुबह ही एनेक्सी पहुंच कर गृह विभाग समेत अन्य अधिकारियों को तलब कर उनसे परिक्रमा रोकने को लेकर किए जा रहे सुरक्षा प्रबंधों के बारे में जानकारी की।
      जानकारों के अनुसार मुख्यमंत्री ने तय प्रबंधों को और चौकस करने को कहा। इसके बाद अधिकारियों ने परिक्रमा से संबंधित छह जिलों में तैनात किए जा रहे अतिरिक्त बल व अधिकारियों की संख्या को बढ़ा दिया।
      आईजी कानून-व्यवस्था राज कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि परिक्रमा फैजाबाद, बाराबंकी, गोंडा, अंबेडकरनगर, बस्ती व बहराइच से होकर अयोध्या पहुंचती है। लिहाजा इन छह जिलों में सतर्कता के खास इंतजाम किए गए हैं।
      आईजी ने बताया कि इन जिलों में दो एसपी, 16 एएसपी, 32 डीएसपी, 80 इंस्पेक्टर, 240 सब इंस्पेक्टर आदि की तैनाती की गई है। यह बल इन जिलों में पहले से तैनात बल के अतिरिक्त है। इसके अलावा पीएसी की 13 कंपनी और एक फ्लड कंपनी तैनात की गई है।
      आईज़ी ने बताया कि इस बल के अलावा आरएएफ भी तैनात की जा रही है। ईद के मौके पर आरएएफ की जो 12 कंपनी आई थी, उसकी अवधि 21 अगस्त को समाप्त हो गई। इसमें से एक कंपनी को रोका गया है जबकि दस कंपनी की मांग और की गई है।
      इसके लिए यह आग्रह किया गया है कि आरएएफ का जो बल यहां आया हुआ है उसमें से वांछित बल के रोकने की अवधि 13 सितंबर तक (परिक्रमा समाप्त होने की प्रस्तावित तिथि) बढ़ दी जाए। आईजी ने कहा कि इससे राज्य को सुरक्षा प्रबंधों के लिए आरएएफ की 11 कंपनी हासिल होंगी।
      --------------84 कोसी परिक्रमा में शामिल होने जा रहे 83 संत गिरफ्तार
      आगरा/ चित्रकूट/ब्यूरो | अंतिम अपडेट 24 अगस्त 2013 2:06 AM IST पर
      fourteen saints arrested
      यूपी बॉर्डर में घुसते ही पुलिस ने 66 संतों को गिरफ्तार कर लिया गया है। संतों का यह काफिला अयोध्या की चौरासी कोस परिक्रमा को राजस्थान से चला था।
      गिरफ्तारी के बाद संतों को पुलिस अभिरक्षा में आगरा पुलिस लाइन लाया गया। उधर, चित्रकूट से अयोध्या जा रहे 17 संतों को सातमील के पास पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
      प्रदेश सरकार के प्रतिबंध के बावजूद ये लोग 25 अगस्त से प्रस्तावित चौरासी कोसी परिक्रमा के लिए अयोध्या जा रहे थे।
      अयोध्या में चौरासी कोस परिक्रमा में शामिल होने के लिए करीब डेढ़ सौ संत राजस्थान के जयपुर से निकले। आगरा से गुजरती हुई संतों की यह यात्रा अयोध्या पहुंचनी थी।
      संतों के आगमन की भनक लगते ही पुलिस हरकत में आ गई। प्रदेश की प्रवेश सीमा पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
      तय कार्यक्रम के मुताबिक संतों की टोली राजस्थान बार्डर से पार होकर चौमा शाहपुर गांव पहुंची। यहां पर पहले से ही मुस्तैद पुलिस ने काफिले को रोकते हुए 66 संतों को गिरफ्तार कर लिया।
      हालांकि एसडीएम किरावली राधा एस चौहान के मुताबिक 45 संत ही गिरफ्तार किए गए हैं। उधर, चित्रकूट के हुसेनगंज थाना क्षेत्र के सातमील के पास चेकिंग में जुटी पुलिस ने 17 संतों को गिरफ्तार कर लिया।
      थाना एसओ जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पिकअप से अयोध्या जा रहे 17 संत पकड़े गए हैं। उनके खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की जा रही है। सीओ निवेश कटियार ने बताया कि कानून व्यवस्था के साथ किसी को खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।
      गिरफ्तार संतों को शनिवार को एसडीएम कोर्ट में पेश किया जाएगा।...................

      पहली पारी में सपा-भाजपा दोनों कामयाब

      लखनऊ/अखिलेश वाजपेयी | अंतिम अपडेट 24 अगस्त 2013 12:08 AM IST पर

      benefits of parikramaसपा सरकार को कानून-व्यवस्था सहित अन्य मुद्दों पर मिल रही बदनामी से फिलहाल निजात मिल गई है। भाजपा को इस बदनामी से निजात मिली है कि वह सूबे में कहीं लड़ाई में ही नहीं है।

      परिक्रमा करने और रोकने को लेकर शुरू हुई कवायद के बाद मुलायम सिंह यादव एक बार फिर मुसलमानों के मसीहा और धर्मनिरपेक्षता के रक्षक के रूप में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

      वहीं, प्रदेश में हाशिए पर खड़ी भाजपा को विहिप और संघ की बदौलत हिंदुओं के बीच यह दावा करने का मौका मिल गया कि उनके हित की बात उनके अलावा दूसरा कोई नहीं उठाने वाला।

      आगे क्या होगा? दोनों में कौन अपने मकसद में कितना कामयाब होगा, यह तो भविष्य केगर्भ में है। पर, फिलहाल तो दोनों ही खेमे यूपी में अपने मकसद में फौरी तौर पर कामयाब होते हुए दिख रहे हैं। परिक्रमा पर प्रतिबंध के बहाने सियासी गलियारों में अयोध्या एक बार फिर चर्चा में है।

      समाजवादी पार्टी की सरकार धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के दावे के साथ परिक्रमा पर प्रतिबंध लगा चुकी है। परिक्रमा की जिद दिखा रहे विहिप और हिंदू नेताओं को अयोध्या से दूर रहने की और न मानने पर गिरफ्तारी की चेतावनी दी जा रही है।

      जवाब में भगवा खेमे की तरफ से सरकार के इस कदम को हिंदू विरोधी नीति करार देकर हिंदुओं से मुस्लिम हितैषी राजनीतिक दलों व सरकारों को सबक सिखाने का आह्वान शुरू हो गया है।

      राजनीतिक विश्लेषकों का निष्कर्ष है कि इस खेल के पीछे लोकसभा के आने वाले चुनाव में वोटों के इंतजाम को सपा व संघ परिवार की मिलीभगत है।

      पर, सपा और संघ परिवार दोनों ही इसे अपने-अपने सिद्धांतों की रक्षा के लिए संघर्ष करार दे रहे है। माहौल कुछ वैसा ही बनाने की कोशिश है, जैसे 1990 में अक्टूबर से पहले दिखाई दे रहा था।

      मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

      बहन जी ठीक कह रही हैं .........


      आठ महीने में जाहिर हो गया सपा का जंगलराज.Oct 30, 08:39 pm

      लखनऊ [जागरण ब्यूरो]। हिमाचल प्रदेश में चुनाव प्रचार से लौटते ही बसपा प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर हल्ला बोला। मंगलवार को जारी बयान में उन्होंने उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक दंगे व तनाव बढ़ने को सपा सरकार की विफलता बताया, साथ ही अपने कार्यकाल में कोई दंगा न होने की याद दिलाई। उनका कहना था कि आठ माह के अल्पकाल में कोसीकलां, बरेली व प्रतापगढ़ के बाद अब फैजाबाद में दंगा होने से सपा का जंगलराज व गुंडाराज जगजाहिर हो गया है। इन शहरों में बार-बार क‌र्फ्यू लगना चिंताजनक है।
      प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी सांप्रदायिक तनाव बना रहने से जनता में दहशत बढ़ी है। सपा सरकार के रवैये ने पुलिस प्रशासन को पंगु बना दिया है। सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के बजाय सरकार हवाई घोषणाओं में आपराधिक स्तर तक व्यस्त है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था संभालने में सपा सरकार काफी लाचार व मजबूर मालूम पड़ रही है। सपा को बसपा से शासन को चलाने का सबक सीख कर प्रदेश में अपराध नियंत्रण का प्रयास करना चाहिए।

      मंगलवार, 23 अक्टूबर 2012

      उत्तर प्रदेश में क्या हो रहा है?

      मान। राजा राम पांडे के लठैत हैं ये सब ....................

      यूपी के मंत्री ने प्रेस फोटोग्राफर को बंधक बनाकर पीटा

      लखनऊ/अमर उजाला ब्यूरो | Last updated on: October 23, 2012 11:11 PM IST

      कैसरबाग पुलिस ने राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त सपा नेता नटवर गोयल को प्रेस फोटोग्राफर को बंधक बनाकर पीटने के आरोप में मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि नटवर ने एक स्कूल को ढहाकर कांप्लेक्स के निर्माण की कवरेज कर रहे एक प्रेस फोटोग्राफर को अपने गुर्गों व दो सुरक्षाकर्मियों की मदद से बंधक बनाकर पीटा और कैमरा व चेन लूट ली।

      हमले की खबर पर पहुंचे अन्य छायाकारों की भी नटवर के गुर्गों ने पिटाई की। घंटों बवाल के बाद कैसरबाग पुलिस नटवर को जीप में लादकर ले गई। दो फोटोग्राफरों ने संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। देर शाम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नटवर गोयल को खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष पद से बर्खास्त कर पार्टी से बाहर कर दिया।

      पुलिस के मुताबिक, राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष नटवर गोयल द्वारा कैसरबाग क्षेत्र में वाल्मीकि मार्ग पर अयोध्या पैलेस नामक कांप्लेक्स का निर्माण कराया जा रहा है। एक अखबार का फोटोग्राफर आशुतोष गुप्ता मंगलवार दोपहर कवरेज करने गया था। फोटो खींचते ही नटवर के गुर्गों ने उसे घेर लिया।

      इस बीच नटवर दो सुरक्षाकर्मियों, अपने मैनेजर रवि सिंह व अन्य साथियों समेत आ धमका और आशुतोष को पीटते हुए अपने केबिन में ले गया। उसका कैमरा व चेन छीन ली। आशुतोष के फोन पर थोड़ी देर में अन्य अखबार के छायाकार आदि वहां पहुंचे। नटवर के गुर्गों ने उन पर भी हमला कर दिया। जब पुलिस अधिकारी पहुंचे तो नटवर ने पत्रकारों पर हमले का आरोप लगाते हुए अपने कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। इसकी फोटो खिंचते देख वह केबिन में जा घुसा।

      पुलिस को पहले तो उसने अपने पद व पहुंच का रौब दिखाया। पत्रकारों के तेवर देखते हुए पुलिस नटवर को जीप में लादकर कैसरबाग कोतवाली ले गई। देर शाम समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री व सपा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नटवर गोयल को अनुशासनहीन आचरण के आरोप में खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष पद और पार्टी की सदस्यता से बर्खास्त कर दिया है।

      कपड़े फाड़ बोला, मैं भी लिखाऊंगा रिपोर्ट
      सत्ता के मद में चूर होकर प्रेस फोटोग्राफर आशुतोष गुप्ता की पिटाई करने वाले राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त सपा नेता नटवर गोयल ने मीडिया की ओर से रिपोर्ट दर्ज करने तथा गिरफ्तारी का दबाव बढ़ता देख पुलिस अफसरों व कैमरे के सामने अपनी शर्ट फाड़ी और बोला मैं भी रिपोर्ट लिखाऊंगा कि फोटोग्राफर ने मुझे पीटा है। इसकी रिकार्डिंग वीडियो कैमरे में होता देख नटवर ने आरोप जड़ा कि छायाकार कांप्लेक्स के निर्माण के बहाने एक महिला की फोटो खींच रहा था।

      नटवर लाल के नक्शेकदम पर नटवर गोयल
      सपा के कद्दावर नेताओं से जोड़तोड़ करके खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष की कुर्सी हथियाने वाले प्रॉपर्टी डीलर व बिल्डर नटवर गोयल का आपराधिक इतिहास भी है। जानकीपुरम के सहारा स्टेट निवासी दीपक सिंह ने सात महीने पहले कैसरबाग कोतवाली में उसके खिलाफ जालसाजी, अमानत में खयानत व बंधक बनाकर धमकाने की रिपोर्ट लिखाई थी। दीपक का आरोप है कि नटवर गोयल ने अपने साथी सलमान, सलीम, अफसर व शमशाद की मदद से जमीन के सौदे के बहाने उसके दस लाख रुपये हड़प लिए। इस मामले की अभी तफ्तीश चल रही है।

      त्रस्त थे पुलिसकर्मी
      नटवर गोयल ने राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद से कैसरबाग पुलिस की नाक में दम कर रखा था। कैसरबाग की चाइना बाजार पुलिस चौकी के सिपाहियों का कहना है कि मामूली बात पर फोन करके पुलिस को बुलाता। किसी भी व्यक्ति को पकड़ने का आदेश देता। थोड़ी देर बाद उसे छोड़ने का फरमान सुनाता। उसकी दखलंदाजी के चलते कुछ ही दिनों में दो चौकी इंचार्जों ने अपना तबादला करा लिया था।

      गुरुवार, 4 अक्टूबर 2012

      सैफई सिर्फ एक गाँव है

      सैफई सिर्फ एक गाँव है इसके विकास की तर्ज़ पर क्या प्रदेश के और गाँव विकसित किये जायेंगे।
      डॉ.लाल रत्नाकर

      रोजगार नहीं मिलने तक देंगे भत्ता: मुलायम

      Oct 04, 11:16 pm
      इटावा [जागरण संवाददाता]। सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि प्रदेश के बेरोजगारों को समाजवादी पार्टी रोजगार देगी और जब तक रोजगार नहीं मिलता तब तक भत्ता दिया जाएगा।
      वह गुरुवार को सैफई महोत्सव पंडाल में इटावा, मैनपुरी के कन्या विद्या धन व बेरोजगारी भत्ता वितरण समारोह में आए लोगों को संबोधित कर रहे थे। इसमें 14500 लाभार्थियों को लाभान्वित किया। उन्होंने कहा कि सपा ने चुनावी घोषणा पत्र में जो वादे किए थे उन्हें एक-एक कर पूरा किया जा रहा है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे कन्या विद्या धन के पैसे का आगे की पढ़ाई में उपयोग करें। लड़कियां केवल इंटर पास न करें बल्कि यूनीवर्सिटी तक जाएं। गांव की लड़कियां अवश्य पढ़ाई करें। उन्होंने कहा कि चार साल पहले के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 58 फीसद महिलाएं निरक्षर थीं।
      उत्तर प्रदेश आदर्श प्रदेश बनाना है। नई उद्योग नीति लागू कर दी है। किसान बीमा योजना के साथ सिंचाई का पानी मुफ्त होगा। फसल का वाजिब मूल्य मिलेगा। लैपटॉप व कंप्यूटर डेढ़ माह में मिलने लगेंगे।
      मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इटावा के लिए 46 योजनाओं व मैनपुरी जनपद के लिए 13 नई योजनाओं की घोषणा की। इटावा में सैफई मेडिकल कालेज में 500 बेड क्षमता विस्तार, ट्रामा एवं बर्न सेंटर निर्माण, सैफई विकास प्राधिकरण का गठन, चार नए विद्युत उपकेंद्र, भरथना में रेलवे उपरिगामी सेतु, क्षतिग्रस्त सड़कों का निर्माण, इटावा स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ, पेयजल योजना का विस्तार, मैनपुरी में किशनी को तहसील का दर्जा, कुरावली में महिला कालेज की स्थापना मुख्य हैं।
      लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि प्रदेश के खारा पानी वाले क्षेत्रों में तीन हजार करोड़ की योजना तैयार की गई है। ऐसे 16 जिलों में अच्छा पानी उपलब्ध होगा। नौ हजार करोड़ की लागत से रजबहा माइनर व नहरें दुरस्त की जाएंगी। तीन साल में सिंचाई पर 20 हजार करोड़ रुपया खर्च होगा। प्रदेश की सड़कें 15 अक्टूबर तक गड्ढा मुक्त हाोंगी।
      श्रम एवं सेवायोजन मंत्री डा. वकार अहमद शाह ने स्वागत व राज्यमंत्री श्रम एवं सेवायोजन शाहिद मंजूर ने समापन भाषण दिया। स्कूली बच्चों के स्वागत गीत गाकर 21 हजार का इनाम पाया। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन, कपड़ा एवं रेशम मंत्री शिवकुमार बेरिया, प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन शैलेष कृष्ण भी थे।
      गुजरात में मुलायम भी ठोकेंगे ताल
      नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने का दूसरे राज्यों में कितना फायदा मिलेगा? अभी से यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन सपा यह प्रयोग जरूर करेगी। शुरुआत गुजरात से होगी। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने गुजरात विधानसभा चुनाव में ताल ठोकने का फैसला कर लिया है। नजर, लगभग सौ सीटों पर खुद की राजनीतिक जमीन आंकने की है। प्रत्याशियों का टिकट अगले 15 दिनों में फाइनल करने की योजना है।
      गुजरात चुनाव में उतरने का फैसला पार्टी ने बहुत सोच-समझकर लिया है, क्योंकि वहां भाजपा व उसके मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के बीच लड़ाई किसी से छिपी नहीं है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव और गुजरात प्रभारी रामजी लाल सुमन कहते हैं,'गुजरात के इस चुनाव में खुद भाजपा के कई पुराने नेता मोदी को हराना चाहते हैं। बावजूद इसके कांग्रेस खुद की राजनीतिक जमीन उतनी मजबूत नहीं बना सकी, जितने की दरकार थी। वहां यूपी व बिहार की बड़ी आबादी रहती है। सपा की पंथनिरपेक्ष छवि देश के अल्पसंख्यकों से छिपी नहीं है। ऐसे में पार्टी वहां सौ सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। कोशिश होगी अगले 15 दिनों में प्रत्याशी तय कर दिए जाएं'।
      गुजरात में पार्टी की नजर कुछ खास क्षेत्रों में है। उसकी पड़ताल के लिए सुमन माह भर पहले अहमदाबाद गए थे। बीते दिनों सूरत में थे। जिताऊ सीटों व मजबूत उम्मीदवारों की तलाश में ही हफ्ते भर बाद बड़ौदा जाएंगे। ज्ञात हो,गुजरात में विस की 182 सीटें हैं, जिसमें से 117 पर भाजपा और 55 पर कांग्रेस का कब्जा है।
      हालाकि, सपा के विस्तार की इस पहल में उसकेगुजरात जाने को कांग्रेस को क्षति पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सपा नेताओं का कहना है कि यह कतई तर्कपूर्ण नहीं कि सपा अन्य दलों के फायदे के लिए दूसरे राज्यों में न जाए। मोदी सरकार के खिलाफ जिस तरह की लड़ाई की जरूरत है, बीते दो दशकों में कांग्रेस चाहकर भी वैसा नहीं कर सकी है। सपा को भी यह हक है कि वह दूसरे दलों की तरह खुद की नीतियां-कार्यक्रम लेकर दूसरे राज्यों में जाए। पार्टी उसी दिशा में आगे बढ़ रही है। बात सिर्फ गुजरात की नहीं, बल्कि आगे चलकर वह मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र में भी यह प्रयास करेगी।