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| लखनऊ/अमर उजाला ब्यूरो | |||
| Story Update : Tuesday, August 14, 2012 12:12 AM | |||
उत्तर प्रदेश सरकार बेरोजगारी भत्ते के एवज में अब बेरोजगारों से कोई काम नहीं लेगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को बेरोजगारी भत्ता अगले महीने के पहले हफ्ते से मिलना शुरू हो जाएगा। भत्ता अब बिना काम कराए ही दिया जाएगा। छात्रों को लैपटॉप व टैबलेट अक्तूबर के आखिरी हफ्ते या नवंबर के पहले हफ्ते में बांटे जाएंगे।
मुख्यमंत्री सोमवार को सचिवालय एनेक्सी में मीडिया से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि लैपटॉप व टैबलेट देने में थोड़ी देरी हो सकती है, क्योंकि इसकी प्रक्रिया में वक्त लग रहा है लेकिन बेरोजगारी भत्ता अगले महीने से देने की पूरी तैयारी है। बेरोजगारी भत्ते के लिए काम कराए जाने की शर्त हटाकर सरकार ने बेरोजगारों को राहत दी है। पहले सरकार का तर्क था कि बेरोजगारों की क्षमता व कौशल विकसित करने के लिए उनसे थोड़ा सा काम लिया जाएगा। बाद में सरकार को अंदेशा हुआ कि काम के चक्कर में कहीं यह योजना बेरोजगारों में उतनी लोकप्रिय न हो, जितनी होने की उम्मीद है। इसलिए सरकार अब उसी तरह बेरोजगारी भत्ता बाटेगी, जिस तरह सपा की पिछली सरकार में बेरोजगारी भत्ता बांटा गया था। विदित हो कि नई सरकार ने सपा के घोषणा पत्र के मुताबिक, नौ लाख से ज्यादा बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने का ऐलान किया था। इसके तहत हर पात्र बेरोजगार को हजार रुपये भत्ता दिए जाने का निर्णय हुआ। बाद में इसमें काम लेने की शर्त भी जोड़ दी गई। मुख्यमंत्री ने सोमवार को इस मुद्दे पर सचिवालय एनेक्सी में श्रम विभाग के अफसरों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की और बाद में पत्रकारों के बीच सरकार के इस निर्णय का ऐलान किया। पहले क्या थी योजना पहले सरकार की योजना थी कि बेरोजगारों से भत्ते के बदले महीने में कुछ दिन बेरोजगारों से जातीय जनगणना, आर्थिक जनगणना, बूथ लेवल पर पर्ची पहुंचाने, पल्स पोलियो अभियान, सरकारी ठेकों में निर्माण कार्यों में लगाया जाए। अब संबंधित नियमावली से यह प्रावधान हटा दिया जाएगा। सरकार का नया निर्णय बेरोजगारी भत्ते के बदले बेरोजगारों से कोई काम नहीं लिया जाएगा। पात्र बेरोजगारों को पिछली सपा सरकार के शासन की तरह ही बेरोजगारी भत्ता प्रदान किया जाएगा। अगले महीने के पहले सप्ताह से ही बेरोजगारी भत्ता देने की अखिलेश सरकार की तैयारी है।
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अंबेडकर पार्क में लगी मायावती की ये आदमकद मूर्ति संगमरमर के पत्थरों से बनाई गई थी
लखनऊ के अंबेडकर स्मारक में लगी पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की आदमकद प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है.
अज्ञात हमलावरों ने संगमरमर से बनी मायावती की इस आदमकद प्रतिमा का सिर और हाथ तोड़कर अलग कर दिया है.
उत्तर प्रदेश के डीजीपी एसी शर्मा ने कहा है कि इस मामले में दो फोटोग्राफर और एक पीआर एजेंसी के प्रमुख को गिरफ्तार किया गया है.
शर्मा का कहना था, '' ये लोग राज्य में सामाजिक शांति भंग करना चाहते थे. इसी षडयंत्र में इन्हें गिरफ्तार किया गया है. फोटोग्राफरों और पीआर वालों ने ही उन लोगों का प्रेस कांफ्रेंस करवाया था जिन्होंने मूर्ति तोड़ी.''
घटनास्थल पर यूपी नवनिर्माण सेना नाम की एक अनजान संगठन के लिखे पर्चे भी मिले हैं, जिसमें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मायावती की सभी मूर्तियों को हटाने की मांग की गयी है.
पार्क की सुरक्षा में तैनात एक गार्ड राम-बचन राम ने पत्रकारों को बताया कि दोपहर करीब डेढ़ बजे, "चार युवक मीडिया के लोगों के साथ आये और उसके मना करने के बावजूद इन लोगों ने मूर्ति की फोटो खींची फिर झटपट लाल टोपी पहनकर प्रतिमा पर चढ़ गए और हथौड़े से उसका सिर और हाथ तोड़ डाला."
गार्ड का कहना है कि जब तक वह अपने अन्य साथियों को बुलाता तब तक हमलावर युवक भाग गए.
इस घटना से कुछ ही देर पहले ही नवनिर्माण सेना के नेता अमित जानी ने प्रेस क्लब में प्रेस कॉफ्रेंस करके आरोप लगाया था कि यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मायावती की मूर्तियों को हटाने का अपना चुनावी वादा ठीक उसी तरह भूल गए हैं जिस तरह से भाजपा सत्ता में आने के बाद राम-मंदिर बनाने के अपने वादे को भूल गई थी.
इसलिए अब ये काम नव-निर्माण सेना के कार्यकर्ता पूरा करेंगे.
निंदा
बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने घटनास्थल पर पहुंच कर विरोध प्रदर्शन किया और मायावती की प्रतिमा तोड़े जाने की निंदा की. कानपुर, ख्वाजापुर और अन्य कई जिलों में भी विरोध-प्रदर्शन किए गए.
विधान-सभा में विपक्षी दल बहुजन-समाज पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या ने घटनास्थल पर पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि बीएसपी नेता की मूर्ति सत्ताधारी समाजवादी पार्टी के इशारे पर तोड़ी गयी है.
बीएसपी नेताओं ने पार्टी कार्यकर्ताओं से संयम बरतने और कानून को हाथ में ना लेने की अपील की है.
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बयान में सुश्री मायावती की मूर्ति तोड़ने की निन्दा करते हुए इसे प्रदेश के सौहार्दपूर्ण माहौल को दूषित करने का सुनियोजित प्रयास बताया है.
"चार युवक मीडिया के लोगों के साथ आये और उसके मना करने के बावजूद इन लोगों ने मूर्ति की फोटो खींची फिर झटपट लाल टोपी पहनकर प्रतिमा पर चढ़ गए और हथौड़े से उसका सिर और हाथ तोड़ डाला."
रामबचन राम, गार्ड, अंबेडकर पार्क.
उन्होंने अभियुक्तों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने तथा टूटी मूर्तियों को तुरन्त ठीक कराने के निर्देश दे दिए हैं.
घटनास्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस-बल को भी तैनात कर दिया गया है और क्षतिग्रस्त प्रतिमा को नीले कपड़े से ढंक दिया गया है.
लखनऊ के जिला मजिस्ट्रेट अनुराग यादव ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी और प्रतिमा ठीक कराकर दोबारा उसी जगह पर लगायी जाएगी.
लखनऊ के जिला मजिस्ट्रेट अनुराग यादव ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी और प्रतिमा ठीक कराकर दोबारा उसी जगह पर लगायी जाएगी.
पुलिस उप-महानिरीक्षक आशुतोष पांडे ने कहा कि कथित संगठन नव-निर्माण सेना और उसके नेता अमित जानी और प्रतिमा तोड़ने के अपराध में शामिल कथित मीडियाकर्मियों के बारे में भी जल्द पता लगा लिया जाएगा.
